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राजस्थान में मेवाड़ की धरती पर 20 बीघा में बन रहा यह पावन धाम…जानें इसकी विशेषता

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नाथद्वारा. पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने उस समय के वातावरण में सनातन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था, जिसके चलते देश में आज जगह-जगह पर केन्द्र स्थापित हुए और गायत्री परिवार के लोग समर्पित भाव से इनमें अपनी सेवाएं दे रहे हैं।पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने ये विचार व्यक्त किए। वे शहर के समीप मावली रोड पर लगभग बीस बीघा से अधिक क्षेत्र की जमीन पर बनने जा रहे गायत्री धाम के शिलान्यास व भूमि पूजन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मेवाड़ की धरती का भी सौभाग्य है कि भगवान एकलिंगनाथजी की इस धरा पर से यहां पर श्रीनाथजी का पदार्पण हुआ और उनको जगह इस धरती ने दी। इसके बाद यह नया तीर्थ गायत्री धाम का निर्माण होगा। हम भी भाग्यशाली हैं, जो इस पवित्र धरती पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि जो प्रयत्न करता है, वो सफल अवश्य होता है यह प्रभु की वाणी है। कोई दुनिया की ताकत आपको नहीं रोक सकती है, भगवान ने आपकी मशीन में ऐसे पुर्जे डाले हैं कि जो चाहो सो करो पर सोचो तो सही। चलोगे ही नहीं तो बढ़ोगे कैसे। जमीन के यहां आवंटन पर उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की। साथ ही डॉ. चिन्मय पंड्या की सेवा प्रकल्पना की प्रशंसा करते हुए कहा कि मन से लगे रहते हैं तो कुछ भी हो सकता है।

वातावरण के प्रभाव से हम आगे बढ़ सकते हैं और नीचे भी सकते हैं गिर

देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंडया ने कहा कि जीवन गलत दिशा में चला जाए तो मनुष्य के जीवन को पापी, दुष्ट, अपराधाी प्रेत और पिशाच बनते हुए देखते हैं। यदि उद्देश्य उत्कृष्ट हो, चिंतन प्रामाणिक हो भावनाएं उदार हो तो हमारे जीवन का वो पथ आलोकित होता है, जो व्यक्ति संत, अवतार एवं गुरु देव के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि नीचे गिर गए तो अंगूलीमाल बन जाते हैं और ऊपर उठ गए तो बुद्ध बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि वातावरण के प्रभाव से हम आगे बढ़ सकते हैं और नीचे भी गिर सकते हैं। इसी भाव से बनास नदी के किनारे इस भूमि का चयन हुआ है इसको साकार करें। इस संकल्पना का बीजारोपण 45 साल पूर्व पंडित श्रीराम शर्मा ने किया था कि 24 शक्तियों का गायत्री धाम स्थापित हो, जिसमें नाथद्वारा शामिल हो गया था, जिसे पं. शर्मा नवजागरण केन्द्र के रूप में देखते थे।

आने वाली पीढिय़ों को करता रहेगा निरंतर संस्कारित

अखिल विश्व गायत्री परिवार ट्रस्ट राजसमंद के तत्वावधान में आयोजित समारोह में मुख्य यजमान के रूप में पूर्व विधायक सीपी जोशी ने कहा कि यह स्थान नाथद्वारा में बनाने की कल्पना उत्तराखंड में जाकर देखा और स्थान चयन किया गया। समारेाह को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक श्रीवर्धन ने संबोधित करते हुए कहा कि यहां पर एक ऐसा धाम बनेगा, जो आने वाली पीढि़्यों को निरंतर संस्कारित करता रहेगा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सरसंघ चालक का भी पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि मथुरा के साथ हरिद्वार में केन्द्र बनाया गया। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी कहती है कि किसी को मुक्ति लेनी है तो एक बार भारत में जन्म लेना पड़ता है।

ह्दय से कोई जीता नहीं और अंदर कोई झांकता नहीं

मिराज समूह के सीएमडी मदन पालीवाल ने कहा कि असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं हुआ और दूसरा स्लोगन मनुष्य परिस्थतियों का दास नहीं है वह उसका निर्माता, नियंत्रणकर्ता एवं स्वामी है, जिस पर उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी लोग मस्तिक से जी रहे हैं। ह्दय से कोई जीता नहीं और अंदर कोई झांकता नहीं है। समारोह को गायत्री परिवार राजसमंद के भंवरलाल पालीवाल, राज्य सभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने भी संबोधित किया। समारोह में गढ़वाड़ा आश्रम की कंकू केशर मां, राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी, उपमुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष मानसिंह बारहठ, हरिसिंह राठौड़, देवकीनंदन गुर्जर सहित कई अतिथि एवं गायत्री परिवार के पदाधिकारी मौजूद थे।

अतिथियों ने किया भूमि पूजन

समारोह में लगभग 20 बीघा से अधिक क्षेत्र में बनने वाले इस गायत्री धाम का सर्वप्रथम भूमि पूजन किया गया। जहां, अतिथियों ने कलश स्थापना के साथ चारों दिशाओं में ईंट रखकर पूजन किया गया। इसके बाद विभिन्न देव स्थानों, तीर्थ स्थलों आदि के साथ पूर्व राजघराने आदि से आई ईंटों को स्थापित किया गया। इस दौरान परिवार के पंडितों ने वैदिक मंत्रोचार किया एवं अतिथियों ने आरती उतार इस कार्य को पूर्ण कराया। वहीं, सुबह 9 कुण्डीय गायत्री यज्ञ में वैदिक मंत्रों की आहुतियां एव कन्या पूजन किया गया। इस अवसर पर श्रीनाथजी मंदिर के श्रीकृष्ण भंडार अधिकरी सुधाकर उपाध्याय, तिलकायत सचिव लीलाधर पुरोहित, सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य ने मंदिर की ओर से सभी अतिथियों का प्रसाद प्रदान कर समाधान किया। गायत्री परिवार के घनश्याम पालीवाल, गिरिजा शंकर, भंवरलाल, तिलकेश सेन, तन्मय पालीवाल, चन्द्रकात पालीवाल सहित गायत्री परिवार के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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