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राजसमंद क्षैत्र के समाचार & अपडेट्स
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कुंभलगढ़. जनवरी के बाद क्षेत्र के पर्यटन में एकदम सुस्ती छा गई, जिसमें गत 15 मई के बाद फिर रौनक लौटती दिखाई दे रही है। वर्तमान में क्षेत्र की अधिकांश होटलें, नेशनल पार्क, दुर्ग, फिश प्वाइंट सहित अन्य पर्यटन स्थल पर्यटकों से गुलजार हैं। होटल व्यवसाइयों का मानना है कि, जनवरी और फऱवरी तो फिर भी ठीक था, लेकिन मार्च और अप्रेल तो बिल्कुल खाली गए हैं। इस दौरान पर्यटन बाजार वीरान सा रहा। हालांकि जहां ब्याव-शादी का अयोजन था वहां फिर भी चहल-पहल बनी रही। लेकिन, शेष जगहों पर सूनापन ही दिखाई दिया।

राजसमंद. जिला मुख्यालय पर 70 से अधिक व्यापारिक और व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने के बावजूद सिर्फ 14 व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के पास ही फायर एनओसी है। ऐसे में फायर फाइटिंग सिस्टम के अभाव में आग लगने की स्थिति में जनहानि होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद नगर परिषद की ओर से संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर में संचालित अधिकांश व्यापारिक, व्यवसायिक और कॉम्पलेक्स प्रतिष्ठानों के पास फायर एनओसी नहीं है। इसके बावजूद संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से इनके हौसले बुलंद है और इसकी अनदेखी कर रहे हैं। फायर एनओसी के अभाव में कभी भी आग लगने की स्थिति में जान-माल का नुकसान हो सकता है। कई प्रतिष्ठानों में अग्नि शमन यंत्र तक नहीं है। ऐसे में किसी भी कारण से आग लगने की स्थिति में सिर्फ दमकल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इससे कभी भी जनहानि हो सकती है। गौरतलब है कि गत दिनों यूपी के एक हॉस्पिटल में आग लगने से कई बच्चे जिंदा जल गए थे। प्रदेश में भी कई हादसे हो चुके हैं। इन हादसों को रोकने और समय रहते इन पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से भी अब सख्ती की जा रही है। इसके चलते अब सभी प्रतिष्ठानों, कॉम्पलेक्स और फ्लेट्र्स के लिए फायर एनओसी लेना आवश्यक कर दिया है।

शहर में सिर्फ इनके पास एनओसी

जिला मुख्यालय पर आर.के.राजकीय चिकित्सालय सहित पांच चिकित्साल, पांच स्कूल और सिर्फ चार होटल संचालकों ने फायर एनओसी है। जबकि जिला मुख्यालय पर छोटी-बड़ी सहित 10 से अधिक निजी स्कूलें संचालित है। इसी प्रकार चार-पांच कॉलेज, 10 के करीब छोटे बड़े चिकित्सालय, 3-4 काम्पलेक्स और सिनेमा हॉल संचालित है। इसके बावजूद सिर्फ 14 ने ही फायर एनओसी ले रखी है। जानकारों की मानें तो व्यावसायिक-व्यापारिक प्रतिष्ठान जिनकी ऊँचाई 9 मीटर या इससे अधिक है। किसी भी तल पर कुल निर्माण अथवा सकल निर्माण क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से अधिक है को भी फायर एनओसी लेना आवश्यक होता है।

फायर एनओसी की यह प्रक्रिया

स्थानीय नगर निकाय में ऑनलाइन आवेदन करने पर अग्मि शमन दल की टीम संबंधित प्रतिष्ठान का मुआयना करती है। वहां पर लगाए गए अग्नि शमन यंत्र की जांच, अलार्म सिस्टम, पानी के टैंक, सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइप लाइन, आवागमन के रास्ते, आग लगने पर बाहर निकलने के रास्ते, उसके लिए लगाए गए चिन्ह और गेट आदि की जांच करती है। इससे संतुष्ठ होने पर ही फायर एनओसी जारी की जाती है। इससे आग लगने की स्थिति में आमजन की जान बच सकती है।

इसलिए होती है आवश्यक

अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) स्थानीय नगर निकाय के अग्नि शमन विभाग की ओर से जारी की जाती है। यह लाइसेंस सुनिश्चित करता है कि आवासीय या व्यावसायिक संपत्ति आग प्रतिरोधी है और आग दुर्घटनाओं के कारण संपत्ति और जीवन को नुकसान होने की संभावना नहीं है।

नगर परिषद की ओर से दिए जा रहे नोटिस

नगर परिषद क्षेत्र में व्यवसायिक और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी नहीं होने पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कुछ ने आवेदन भी किए हैं। इनकी जांच के बाद फायर एनओसी दी जाएगी। यह सभी के लिए आवश्यक है।

दुर्गेश सिंह रावल, आयुक्त नगर परिषद राजसमंद

प्रदेश में यहां खुलेंगे 40 नए प्राथिमक विद्यालय…जाने कहां खुलेंगे स्कूल

राजसमंद. प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में नए प्राथमिक विद्यालय खोलने के आदेश जारी कर दिए हैं। इन विद्यालयों के खुलने से प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा में मजबूती मिलेगी। इस संबंध में निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने आदेश जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार परिवर्तित बजट घोषणा वर्ष 2024-25 की पालना में प्रदेश में 40 स्थानों पर नवीन राजकीय प्राथमिक विद्याल खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राजसमंद जिले में भी दो नवीन प्राथमिक विद्यालय खोले जाएंगे। इसमें आमेट ब्लॉक में जाटों की भागल और धनोली में ये विद्यालय खोले जाएंगे।

इस प्रकार लगाए जाएंगे शिक्षक

नए खुलने वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य शुरू करने को लेकर भी निदेशक ने आदेश जारी किए हैं। उन्होंने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि सम्बन्धित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी संबंधित ब्लॉक के रा.प्रा.वि./रा.उ.प्रा.वि., जहां नामांकन की अपेक्षा कार्यरत शिक्षकों की संख्या अधिक है, उन विद्यालयों से अध्यापक लेवल 1 के अधिकतम दो शिक्षक (नामांकन के आधार पर) लगाया जाएगा।

ये रहेंगे प्रमुख शर्तें

विद्यालय सत्र 2024-25 से प्रारम्भ किया जायेगा ।

नवीन खोले जाने वाले विद्यालय में पदों का आवंटन विभाग में उपलब्ध आरक्षित पदों में से स्टाफिंग पैटर्न में निर्धारित मानदण्डानुसार किया जाएगा।

इन विद्यालयों में भवन निर्माण समग्र शिक्षा अभियान, नाबार्ड, एमपीएलएडी अथवा जन सहयोग के माध्यम से कराया जाएगा।

विद्यालय संचालन के लिए राजकीय भवन की उपलब्धता होने तक किसी अन्य सुरक्षित भवन की वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्यालय संचालित कराया जाएगा।

प्रदेश में कहां कितने स्कूल खुलेंगे

अलवर में एक, बालोतरा में एक, बाड़मेर में दो, ब्यावर में दो, बीकानेर में चार, चित्तौडगढ़़ में दो, दौसा में एक, दूदू में एक, गंगापुर सिटी में एक, हनुमानगढ़ में एक, जयपुर ग्रामीण में एक, जयपुर नगर में एक, जैसलमेर में चार, जालोर में चार, जोधपुर ग्रामीण में तीन, कोटा में दो, नागौर एक, नीमकाथाना में दो, पाली में एक, फलौदी में एक, राजसमंद में दो, सांचोर में एक, शाहपुरा में एक नवीन प्राथमिक विद्यालय खोला जाएगा।

राजसमंद. सिंचाई विभाग को खारी फीडर को चौड़ा करवाने के लिए करीब 8 से 10 हेक्टेयर जमीन अवाप्त करने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही फीडर को चौड़ा करने का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उक्त कार्य के लिए आज टेण्डर अपलोड किए जाएंगे, जिसे अगले माह के अंत तक खोला जाना प्रस्तावित है। जनवरी के अंत तक काम शुरू करवाने के प्रयास किए जाएंगे। नाथद्वारा स्थित बाघेरी का नाका के ओवरफ्लो होने पर उसका पानी नंदसमंद पहुंचता है। यहां से खारी फीडर के माध्यम से पानी राजसमंद झील में आता है। खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए राज्य सरकार ने बजट में 150 करोड़ की घोषणा की है। इसके तहत सिंचाई विभाग की ओर से डीपीआर तैयार कर उसे उदयपुर स्थित जोन और सर्कल ऑफिस भेजा गया। वहां पर उसकी जांच आदि कर उसे जयपुर भेजा गया है। वहां पर डीपीआर की बारीकी से जांच के पश्चात प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की गई। उदयपुर स्थित मुख्यालय से तकनीकी स्वीकृति जारी हो गई है। स्थानीय सिंचाई विभाग की ओर से इसके लिए टेण्डर प्रक्रिया जारी है। विभाग की ओर से 28 नवम्बर को टेण्डर अपलोड किए जाएंगे। इसे 27 दिसम्बर को खोला जाना प्रस्तावित है। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले साल के प्रथम माह के अंत तक काम शुरू हो सकता है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए बजट में घोषणा की है। उसे भी अमली जामा पहनाया जा रहा है। कांग्रेस राज में 80 करोड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन यह सिर्फ घोषणा ही बनकर रह गई थी।

दो माह बंद करना पड़ेगा काम

नंदसमंद से राजसमंद झील तक की दूरी 32.40 किमी है। खारी फीडर को चौड़ा करने के काम को 30 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खारी फीडर से अमूमन अगस्त और सितम्बर माह में नंदसमंद से राजसंद झील में पानी की आवक होती है। इसके कारण दो माह काम बंद रहेगा। चरणबद्ध तरीके से काम करवाया जाएगा। इसके साथ ही खारी नदी और गोविन्द नाल पर कॉलम के माध्यम से काम करवाया जाना प्रस्तावित है।

पांच दशक से ज्यादा पुरानी खारी फीडर

जानकारों के अनुसार राजसमंद झील को भरने के लिए 1962 से 1968 के बीच खारी जल पूरक योजना बनाई गई थी। इसके तहत ही फीडर का निर्माण करवाया गया था। इससे प्रतिवर्ष झील में पानी की आवक होती है। खारी फीडर पांच दशक से ज्यादा पुरानी होने के कारण कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं कुछ स्थानों पर रिसाव भी होता है। इससे आस-पास के खेतों में पानी भर जाता है।

करनी पड़ेगी भूमि अवाप्त

सिंचाई विभाग के जानकारों के अनुसार वर्तमान में खारी फीडर है उसे दुगना चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। फीडर के आस-पास पहले ही सिंचाई विभाग की जमीन है। कुछ स्थानों पर जमीन अवाप्त करनी होगी। जो 8 से 10 हेक्टेयर के बीच हो सकती है। कुछ जगह पहाडिय़ों को काटना पड़ेगा। कई जगह पुलिया का निर्माण भी करवाया जाएगा।

जल्द अपलोड होंगे टेण्डर, अगले माह जाएंगे खोले

बजट घोषणा के अनुसार खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए टेण्डर 28 नवम्बर को अपलोड किए जाना प्रस्तावित है। इसे अगले माह के अंत तक खोला जाएगा। कुछ स्थानों पर जमीन की अवाप्त करनी पड़ेगी। चरणबद्ध तरीके से निर्माण करवाया जाएगा।

प्रतीक चौधरी, एक्सईएन सिंचाई विभाग राजसमंद

राजसमंद. मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत निर्माणाधीन फ्लेट का काम कछुआ चाल से चल रहा है। उक्त प्रोजेक्ट को चलते हुए सात साल से अधिक हो गए हैं। लेकिन अभी भी 192 फ्लेट के निर्माण कार्य का श्रीगणेश तक नहीं हुआ है, जबकि संबंधित ठेकेदार फर्म मार्च 2025 तक काम पूरा करने का दावा कर रही है। शहर के देवथड़ी पुलिस लाइन के पीछे मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत 1072 मकानों का 2017 में शिलान्यास हुआ था। जानकारों के अनुसार निर्माण कार्य फरवरी 2021 में पूरा होना था, लेकिन कोरोना के कारण समय सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2022 कर दी थी। संबंधित ठेकेदार फर्म ने 288 मकानों के निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ दिया। इसके पश्चात कई माह तक काम पूरी तरह से बंद रहा। सितम्बर 2023 में नई ठेकेदार फर्म ने फिर से काम शुरू किया। अगस्त 2024 तक उक्त काम को पूरा किया जाना था, लेकिन अभी तक 192 फ्लेट का निर्माण के लिए अभी तक नींव तक नहीं खुदी है। वर्तमान में आधे फ्लेट्र्स का काम भी पूरा नहीं हुआ है, जबकि नगर परिषद के अधिकारियों को संबंधित फर्म की ओर से मार्च 2025 तक काम पूरा करने के लिए आश्वस्त किया है, जबकि वर्तमान काम की गति को देखते हुए 2025 के अंत तक भी काम पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। आधे-अधूरे काम की वजह से आवंटियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल

1072 मकानों का करना है निर्माण

640 फ्लेटों का काम हुआ पूरा

240 फ्लेट निर्माणाधीन, काम जारी

192 फ्लेट का काम नहीं हुआ शुरू

44.28 करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट

34.14 करोड़ खर्च हो चुके अब तक

77 प्रतिशत काम पूरा, 33 प्रतिशत शेष

एसटीपी का नहीं अता-पता, बोरिंग से चल रहा काम

मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत बनने वाले फ्लेट से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए एसटीपी बनाया जाना प्रस्तावित है। यहां पर कई माह पहले इसके लिए गड्ढ़ा खोदा गया था, उसका भी कोई अता-पता नहीं है। फ्लेट्स के बीच सीवरेज लाइन बिछाने का काम जारी है। यहां पर अधिकांश जगह अभी ुपक्के रोड नहीं बने है। इसके साथ ही यहां पर साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है, लेकिन उनका भी कोई अता-पता नहीं है। बोरिंग के पानी से काम चलाया जा रहा है। पाइप लाइन और पानी की टंकी का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है।

122 से अधिक आवंटियों ने फेरा मुंह

जानकारों के अनुसार अब तक 122 से अधिक आवंटि उक्त योजना से मुंह फेर चुके हैं। इसमें किसी ने एक किश्त जमा कराई तो किसी ने दो किश्त जमा कराने के बाद शेष किश्त जमा ही नहीं कराई है। नगर परिषद की ओर से इसके लिए कई बार नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन किसी के रूचि नहीं दिखाने पर नगर परिषद की ओर से करीब 122 आवंटियों के आवंटन का निरस्त कर दिया है। अब जिनके फ्लेट का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है उन्हें आवंटन करने की तैयारी की जा रही है।

100 से अधिक परिवारों ने रहना किया शुरू

आवास योजना के तहत 640 फ्लेट का निर्माण पूरा होने के बाद से कुछ आवंटियों को कब्जा सौंपा जा चुका है। ऐसे में यहां पर अब 100 से अधिक परिवारों ने रहना शुरू कर दिया है। हालांकि इसमें कुछ ने किराए पर फ्लेट ले रखे हैं। दीपावली के बाद से इसमें तेजी आई है। योजना के तहत सुविधाएं पूरी मिलने की स्थिति में इनकी संख्या में और इजाफा हो सकता है।

हाइवे से प्रवेश करना ही मुश्किल

उदयपुर से जयपुर के बीच गुजर रहे हाइवे पर राजसमंद पुलिस लाइन के पास से मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत निर्माणाधीन फ्लेट्र्स में जाने का मुख्य मार्ग है। वर्तमान में उक्त हाईवे पर सर्विस लाइन का निर्माण जारी है। इसके कारण उक्त रोड को खोद दिया गया है। इसके कारण अब करीब दस फीट से अधिक ऊंचाई हो गई है। ऐसे में पैदल चढऩा मुश्किल हो गया है। उक्त रोड पर रोड लाइटें भी नहीं है। इसके कारण रात्रि के समय आवाजाही मुश्किल हो जाती है।

ठेकेदार से की बात, काम जल्द पूरा करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत निर्माणाधीन फ्लेट्र्स का काम जल्द गति पकड़ेगा। त्यौहारों के चलते अधिकांश श्रमिक चले गए थे, इसके कारण गति धीमी चल रही है। संबंधित ठेकेदार को बुलाकर अतिरिक्त श्रमिकों को लगाकर काम को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

दुर्गेश सिंह रावल, आयुक्त नगर परिषद राजसमंद

राजस्थान के इस शहर में खोले चार उप नगरीय मार्ग…पढ़े क्या होगा फायदा और कैसे

मधुसूदन शर्मा

राजसमंद. एक साथ दो एकेडिमक प्रोग्राम की पढ़ाई करने को लेकर विश्वविद्यालय गंभीर नहीं है। इसको लेकर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (यूजीसी) ने चिंता जताई है। जानकारी के अनुसार अप्रैल 2022 में यूजीसी ने दो कोर्स एक साथ करने का फैसला किया था। इसको लेकर सितंबर माह में इसकी गाइड लाइन जारी की। यूजीसी की ओर से जारी की गई गाइडलाइन को दो वर्ष से अधिक समय बीत गया लेकिन अभी तक किसी भी विश्वविद्यालय ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया है। इसको लेकर यूजीसी के पास लगातार इस संदर्भ में शिकायतें आ रही है। ऐसे में विद्यार्थियां को दो कोर्स में एक साथ एडमिशन नहीं मिल पा रहा है।

ये वजह आ रही सामने

एडमिशन नहीं दिए जाने के बाद एक बात सामने आ रही है। वो ये की कभी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जमा करवाने की बात की जाती है तो कभी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट न होने का कहकर एडमिशन करने से इनकार कर दिया जाता है। जिसके कारण विद्यार्थियां को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले की गंभीरत को देखते हुए यूजीसी के सचिव प्रफेसर मनीष आर जोशी ने विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। उन्होंने देश में इन संस्थानों से स्पष्ट कहा है कि एक ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि छात्र को दो कोर्स में दाखिला लेने में परेशानी ना हो।

… तो कामयाब नहीं होगा यूजीसी का मकद

यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि माइग्रेशन सर्टिफिकेट न होने पर छात्र को दूसरे कोर्स में दाखिला नहीं दिया जाता है, तो दो डिग्री कोर्स का मकसद कामयाब नहीं हो पाएगा। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन दो वर्ष से ज्यादा समय बीतने पर भी इस गाइडलाइन को लागू नहीं किया है। इसको लेकर यूजीसी प्रशासन बेहद गंभीर है।

विश्वविद्यालयों को चेताया

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने यूनिवर्सिटीज को आगाह किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत लागू किए जा रहे शिक्षा सुधारों को लागू करना ही होगा। विश्वविद्यालयों को चेतावनी भी दी है कि यदि वे ऐसा हनीं करते हैं तो उनकी लापरवाही मानते हुए उनसे जवाब-तलब किया जाएगा।

एक ही समय एक साथ किए दोनों ही कोर्स वैध रहेंगे

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस व्यवस्था के साथ एक ही समय एक साथ किए दोनों ही कोर्स वैध रहेंगे। अभी तक की व्यवस्था में ऐसा नहीं था। एक समय में एक ही कोर्स वैधता थी। साथ ही उसे ही करने की अनुमति थी। आस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित दुनिया के दूसरे देशों के उच्च शिक्षण संस्थान पहले से ही ऐसे कोर्स संचालित कर रहे हैं। गौरतलब है कि यूजीसी ने इससे जुड़ा ड्राफ्ट अप्रैल में ही जारी किया था, जिसे बाद में शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी थी।

2012 की गई थी पहल, बताई थी ये समस्या

एकसाथ दो डिग्री पूरा करने का ये मुद्दा पहली बार नहीं उठा है। इससे पहले 2012 में भी यूजीसी ने एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी की अध्यक्षता हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वीसी फुरक़ानक़मर कर रहे थे। उन्होंने यूजीसी को दिए सुझाव में कहा गया था कि रेगुलर मोड में पढ़ाई कर स्टूडेंट को एक अतिरिक्त डिग्री लेने की छूट होनी चाहिए। दूसरी डिग्री ओपेन या डिस्टेंस मोड में उसी या किसी दूसरी यूनिवर्सिटी से भी हो सकती है। लेकिन एक साथ रेगुलर मोड में दो डिग्री पूरी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इससे एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव, दोनों तरह की समस्याएं हो सकती हैं। उस समय इन सुझावों को ज्यादा समर्थन नहीं मिल पाया था। इसलिए इस गाइडलाइन पर काम नहीं हो सका था। 2019 में एक समिति बनाई थी। इस समिति का काम ये पता करना था कि अलग-अलग यूनिवर्सिटी में या फिर एक ही यूनिवर्सिटी में, ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड या पार्ट टाइम मोड में किस तरह से एकसाथ दो डिग्री पूरी की जा सकती है।

राजसमंद. महाराणा प्रताप से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों पर लाखों रुपए खर्च कर बनाए टॉयलेट पर लगे ताले आखिरकार खोल दिए गए हैं। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अधिकारियों ने स्थलों का मुआयना किया और कार्मिकों को टॉयलेट चालू करने के निर्देश दिए। शाहीबाग व चेतक समाधि स्मारक पर बने टॉयलेट मंगलवार को चालू कर दिए गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उदयपुर उपमंडल के संरक्षण सहायक दीपक मीणा व अन्य ने सोमवार को बादशाही व चेतक समाधि स्मारक परिसर में बनकर तैयार टॉयलेट का निरीक्षण किया, जिन पर कई महीनों से ताले लगे हुए थे। एएसआई अधिकारी ने हल्दीघाटी व खमनोर में संरक्षित स्मारकों व उद्यान में कार्यरत कार्मिकों को टॉयलेट चालू करने के निर्देश दिए। मंगलवार को पुरातत्वकर्मियों ने बादशाही बाग व चेतक समाधि स्मारक परिसर में बने टॉयलेट के ताले खोलकर साफ-सफाई की। पानी के प्रबंध किए और टॉयलेट पर्यटकों के लिए खोल दिए। हालांकि रक्ततलाई में अभी भी पर्यटकों के लिए टॉयलेट की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। बताया गया कि रक्ततलाई व शाहीबाग उद्यान परिसर में 10 साल पहले लाकर रखे गए फाइबर से बने रेडिमेड टॉयलेट अवधि पार होने से उपयोगी नहीं रहे हैं। ऐसे में इन टॉयलेट का उपयोग होने की संभावना कम ही है।

उल्लेखनीय है कि पत्रिका ने ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों के लिए बने टॉयलेट पर ताले लगे होने पर 24 नवंबर 2024 को ‘टॉयलेट बनाने में लाखों खर्च, क्या ताले खोलने में भी लगेंगे रुपए!’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद एएसआई अधिकारी हरकत में आए और उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों का मुआयना कर टॉयलेट चालू कराने के निर्देश दिए।

पंचायत समितियों को भी जारी किए निर्देश

इधर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा ने भी पत्रिका में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए जिले की सभी पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। सीईओ ने सभी बीडीओ को पत्र भेजकर 29 नवंबर 2024 को जिले की उन सभी ग्राम पंचायतों, जिनमें बने सामुदायिक शौचालयों पर ताले लगे हुए हैं और उपयोग में नहीं लिए जा रहे हैं, उन्हें खोलकर चालू करवाने व आमजन के लिए उपयोगी बनाने के निर्देश दिए हैं।

राजसमंद. प्रदेश के सरकारी स्कूल काफी समय से व्याख्याताओं के अभाव में परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन कुछ समय बाद इस परेशानी से निजात मिलने वाली है। क्योंकि पदोन्नति कर व्याख्याता स्कूलों में लगाए जाएंगे जिससे इनकी कमी की पूर्ति होगी। जानकारी के अनुसार प्रदेश में राज्य के उच्च माध्यमिक स्कूलों में वर्तमान में व्याख्याता के 17550 पद रिक्त चल रहे हैं। इनकी डीपीसी कर इनको पदोन्नत किया जाएगा। जिससे स्कूलों में व्याख्याताओं के रिक्त पदों में कमी आएगी। गौरतलब है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 10530 सैकण्ड ग्रेड शिक्षकों की व्याख्याता पदों पर पदोन्नति की गई है। हाल ही में आरपीएससी अजमेर में वर्ष 2021-22 और वर्ष 2022-23 की डीपीसी के लिए बैठक आयोजित की थी। इसमें 10530 सैकंड ग्रेड शिक्षकों की डीपीसी की गई है।

आरपीएससी से अनुमोदन के बाद जारी होंगे आदेश

जानकारी के अनुसार आरपीएससी की ओर से इनका अनुमोदन किया जाएगा। यहां से अनुमोदन किए जाने के बाद सूची माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पास जाएगी और वहां से इनके चयन आदेश जारी किए जाएंगे। व्याख्याता पदों के अलावा 88 उपाचार्य, 485 प्रधानाध्यापक, 24 उप जिला शिक्षाधिकारी, 20 पुस्तकालय अध्यक्ष ग्रेड-1 इसके अतिरिक्त 663 शारीरिक शिक्षक और 93 पुस्तकालय अध्यक्ष शामिल है। डीपीसी में प्रमोट हुए व्याख्याता के पदस्थापना के बाद इनमें से 10 हजार से अधिक पद भर पाएंगे।

चार साल से बकाया चल रही थी डीपीसी

जानकारी के अनुसार व्याख्याता पदों की पिछले 4 साल की डीपीसी बकाया है। इसके लिए लगातार शिक्षक संगठनों की ओर से मांग उठाई जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने वर्तमान में दो वर्षों की डीपीसी की है। लेकिन दो वर्ष की अभी भी बाकी रह गई है। जिसका भी शिक्षकों को इंतजार बना हुआ है। इधर पदोन्नत सभी कार्मिकों को शीघ्र ही पदस्थापन किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

…तो भर जाएंगे 87 प्रतिशत पद

राज्य के स्कूलों में व्याख्याताओं के 55340 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से वर्तमान में 31 प्रतिशत पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं। डीपीसी में पदोन्नत हुए 10 हजार व्याख्याताओं को पोस्टिंग दिए जाने के बाद सिर्फ 13 प्रतिशत ही रिक्त रहेंगे। इसे भी दो साल की शेष रही डीपीसी को करके पदों को पूरा भर दिया जाएगा। इस दिशा में सरकार की ओर से कार्य किया जा रहा है।

राजसमंद. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल ने उप कारागृह भीम का निरीक्षण कर कारागृह की भोजन, सफाई, आवास, सुरक्षा इत्यादि व्यवस्थाओं की जानकारी हासिल की। अग्रवाल ने बताया कि कारागृह में कुल 17 बंदी निरुद्ध मिले। उन्होंने इस दौरान बंदियों से संवाद किया। बंदियों ने अपने प्रकरण में अधिवक्ता नियुक्त होने की जानकारी दी। कारागृह में कोई भी बंदी 18 साल से कम उम्र का निरूद्ध नहीं मिला। बंदियों ने भोजन के प्रति संतोष जताया। बंदियों को यूटीआरसी कैम्पेन में अनुशंसा, पैन इंडिया द रिस्टोरिंग यूथ, लोक अदालत, स्थाई लोक अदालत, निःशुल्क विधिक सहायता, मध्यस्थता, राजस्थान पीडि़त प्रतिकर स्कीम आदि बारे में जानकारी दी।

Rajsamand News: कुंवारिया। कहते हैं कि व्यक्ति के जीवन में जब परेशानी आती है तो एक साथ आती है, जिससे वह चारों ओर से घिर जाता है। कुछ इसी प्रकार के हालात कुंवारिया के एक परिवार में देखने को मिल रहे हैं, जहां पर एक दिव्यांग युवती पहले से ही शारीरिक रूप से अक्षम होने से परेशान है, वहीं, अब उसका एकमात्र सहारा उसकी मां भी दुनिया से चल बसी, जिससे अब उसकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं बचा है।

कस्बे के सालवी मोहल्ला निवासी काली (25) पुत्री नारायण लाल सालवी जन्मजात दिव्यांग है। वह मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग होने से दैनिक दिनचर्या के कार्य भी अपने स्तर पर नहीं कर पाती है। उसके पिता नारायण लाल का पन्द्रह वर्ष पूर्व ही निधन हो गया था, जिसके बाद उसकी मां नारायणी देवी ही उसकी देखभाल और भरण-पोषण कर रही थी।

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लेकिन, गत 2 नवंबर को नारायणी देवी अपनी बेटी के स्वास्थ की मंगल कामना की मन्नत लेकर एक स्थानक पर अरदास करके कुंवारिया की तरफ लोट रही थी कि टपरिया खेड़ी चौराहा पर एक हादसे का शिकार होने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। इसके बाद 9 दिन तक उदयपुर चिकित्सालय में उपचार चला तथा 15 नवंबर को दिव्यांग की मां का निधन हो गया। ऐसे में दिव्यांग युवती काली अपनी मां को आसपास नहीं पाकर काफी बेचैन व परेशान रहने लगी है। इसको लेकर सालवी समाज के लोगों ने जिला प्रशासन से दिव्यांग युवती के लिए विशेष राहत व सहयोग प्रदान करवाने की मांग की है।

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राजसमंद. शनिवार को राजसमंद में उच्च न्यायालय जोधपुर के न्यायाधीपति फरजंद अली और कुलदीप माथुर का आगमन हुआ, जिसे लेकर जिला न्यायालय परिसर में एक शानदार स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। जिले के न्यायिक अधिकारियों ने उनका जोरदार अभिनंदन किया, जिसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश राघवेंद्र काछवाल समेत अन्य न्यायधीशों ने उनका स्वागत किया।

न्यायाधीपतियों के स्वागत के बाद, दोनों ने राजसमंद स्थित भिक्षुनिलयम में आयोजित बार एसोसिएशन के सेमिनार में भाग लिया, जहां उन्होंने कानून, न्याय, और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस सेमिनार का उद्देश्य न्यायिक सुधार और न्याय की बेहतर समझ को प्रोत्साहित करना था। न्यायाधीपतियों ने इस अवसर पर राजसमंद के न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की और उनके कार्यों को करीब से समझा। उन्होंने न्यायालय परिसर का दौरा किया, जहां जिला न्यायाधीश काछवाल ने उन्हें वहां की व्यवस्थाओं और चल रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी।

उनकी बातों ने सभी उपस्थित अधिवक्ताओं को प्रेरणा दी और कानून के प्रति उनके दृष्टिकोण को और स्पष्ट किया। यह सेमिनार न सिर्फ एक शैक्षिक मंच था, बल्कि एक दिशा भी प्रदान करता है कि किस तरह न्यायपालिका को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे समाज में न्याय का पक्का विश्वास बना रहे।

ई फाइलिंग, साइबर क्राइम पर चर्चा

उच्च न्यायालय, जोधपुर के न्यायाधिपति फरजंद अली और न्यायाधिपति कुलदीप माथुर ने भिक्षुनिलयम में बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित सेमिनार में शिरकत की। कार्यक्रम में विधायक दीप्ति माहेश्वरी भी पहुंची। न्यायाधिपति का बार एसोसिएशन द्वारा स्वागत किया गया। मंच पर जिला एवं सेशन न्यायाधीश राघवेंद्र काछवाल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील कुमार पाराशर, सचिव ऋषि राज पालीवाल भी मौजूद रहे। इस सेमीनार में विभिन्न कानूनी व प्रशासनिक विषयों, न्याय और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने, ई फाइलिंग प्रणाली, साइबर क्राइम लॉ, न्यायालयों के समक्ष चुनौतियों, आवश्यकताओं आदि पर चर्चा की। भीम थानाधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने साइबर अपराधों को लेकर विचार प्रस्तुत किए। सिस्टम ऑफिसर मनीष जैन ने ई फ़ाइल, डॉ सत्येन्द्र सिंह सांखला ने नए कानून पर जानकारी प्रस्तुत की। इस मौके पर बार के उपाध्यक्ष राजेश पालीवाल, कोषाध्यक्ष मानसिंह राठौड़, संयुक्त सचिव सुरेश सी आमेटा, पुस्तकलायाध्यक्ष लक्ष्मण गुर्जर, विकास मंत्री फिरोज खान, खेल एवं संस्कृति मंत्री मुकेश दाधीच आदि मौजूद रहे।

राजसमंद. कुंवारिया तहसील क्षेत्र के नया घर ढुलियाणा से देवरी खेड़ा चौराहा तक विगत चार वर्षों से अधूरी पड़ेसड़क के निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने पर ग्रामीणों ने खुशी जताई है। नयाघर ढुलियाणा से देवरी खेड़ा चौराहा का मार्ग कच्चा होने पर ग्रामीणों की ओर से लगातार मांग करने पर डीएमएफटी योजना में करीब ढाई किलोमीटर लंबी इस सड़क के डामरीकरण का कार्य स्वीकृत किया गया था। इसके तहत ठेकेदार ने निर्माण कार्य शुरू किया और सड़क पर गिट्टी बिछाने के बाद निर्माण कार्य बंद हो कर दिया, जो विगत चार वर्षों से अधूरा ही पड़ा हुआ था।

इसके कारण पथरीले मार्ग से होकर गुजरने में ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही थी। वहीं, आए दिन दुपहिया वाहन चालक वाहन फिसलने से गिरकर घायल हो रहे थे। ऐसे में ग्रामीणों की शिकायतों पर राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी के प्रयासों से इस मार्ग पर दोबारा से सड़क का निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके तहत वर्तमान में रोलर के माध्यम से ग्रेवल को बिछाकर सड़क निर्माण के लिए लेवलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस मार्ग पर सड़क निर्माण फिर से शुरू होने पर मादडी सरपंच सीमा कुंवर, पूर्व सरपंच राधा देवी भील, पूर्व उपसरपंच प्रेमसिंह, भाजपा मण्डल महामंत्री कालू सिंह राठौड़, कल्याणसिंह, गोविंद सिंह, गोपीलाल गुर्जर सहित ग्रामीणों ने हर्ष जताया है।

सड़क निर्माण से होगा सीधा जुड़ाव

नया घर ढुलियणा से देवरी खेड़ा चौराहा तक प्रस्तावित ढाई किलोमीटर लंबी सड़क का कार्य पूरा होते ही ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी। इस सड़क का निर्माण होने के बाद कुंवारिया-साकरोदा मार्ग से आमेट-मादड़ी मार्ग का सीधा जुड़ाव हो जाएगा, जिससे आमजन को लंबा चक्कर लगाते हुए आने-जाने से मुक्ति मिलेगी।

राजसमंद. सर्दी ने दस्तक दे दी है और जैसे ही ठंड का अहसास होने लगता है, बाजार में स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाइयों का चलन भी तेजी से बढ़ने लगता है। सर्दियों के मौसम के साथ ही मूंगफली, गजक, रेवड़ी, और ताजे पिंड खजूर की दुकानों पर भारी भीड़ जमा होने लगी है। ये सिर्फ स्वाद का ही नहीं, बल्कि सेहत का भी खजाना मानी जाती हैं।

गरीबों का मेवा: मूंगफली की दुकानें सजीं

मूंगफली, जिसे ‘गरीबों का मेवा’ भी कहा जाता है, इन दिनों बाजारों में खास आकर्षण का केंद्र बन गई है। सर्दी के मौसम में मूंगफली का सेवन सेहत के लिए अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को गर्माहट देती है और ऊर्जा का अच्छा स्रोत भी बनती है। जैसे ही बाजार में यह ताजे दाने बिकने के लिए आते हैं, उनके चारों ओर लोग इकट्ठा हो जाते हैं।

गजक और रेवड़ी का स्वादिष्ट मौसम

गजक, तिल और गुड़ से बनी यह मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद करती है। वहीं, रेवड़ी के स्वाद से सर्दी के मौसम का मजा दोगुना हो जाता है। इसका कुरकुरापन और गुड़ की मिठास दिल को लुभाती है, और इसे खाते ही सर्दी से राहत मिलती है।

सामाजिक बदलाव और पारंपरिक स्वाद की ओर कदम

सर्दी के साथ-साथ समाज में एक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। आजकल, जहां एक ओर मॉल्स और कैफे की दुकानें फल-फूल रही हैं, वहीं दूसरी ओर, पारंपरिक मिठाइयों के स्टॉल्स भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी सड़क किनारे सजी इन दुकानों पर लोग बढ़-चढ़कर पहुंच रहे हैं। यहां रंग-बिरंगे रेवड़ी, ताजे मूंगफली के दाने और गजक की महक से माहौल भी गुलजार हो जाता है।

दुकानदारों का उत्साह और सर्दियों का स्वागत

इन दुकानदारों का उत्साह भी खासा बढ़ गया है। एक व्यापारी का कहना था, “सर्दी के मौसम ने हमारे व्यापार में नई जान फूंक दी है। लोग अब फिर से इन पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद लेने के लिए आते हैं और हम भी उन्हें ताजे और स्वादिष्ट उत्पाद देने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।”

क्या है इन पारंपरिक मिठाइयों में खास?

मूंगफली: सर्दी में मूंगफली खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और यह ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है।

गजक: तिल और गुड़ से बनी गजक स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हड्डियों को मजबूत भी बनाती है।

रेवड़ी: रेवड़ी का कुरकुरापन और गुड़ की मिठास सर्दी में खासतौर पर दिल को लुभाती है।

इन पारंपरिक व्यंजनों का सेवन न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को भी अंदर से ताजगी और गर्माहट प्रदान करता है। इस सर्दी में बाजारों में सजी इन मिठाइयों के स्टॉल्स, पुरानी परंपराओं के प्रति बढ़ते आकर्षण का स्पष्ट उदाहरण हैं।

राजसमंद. खमनोर में रक्ततलाई से लेकर बलीचा में चेतक समाधि तक ऐतिहासिक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को टॉयलेट उपलब्ध कराना शायद प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं है, तभी तो लाखों रुपए खर्च कर बनाए और स्थापित किए गए टॉयलेट पर वर्षों से ताले पड़े हुए हैं। ग्रीष्मावकाश, दीपावाली और दिसंबर-जनवरी में सर्दी की छुट्टियों पर हल्दीघाटी के पर्यटन स्थलों पर टूरिज्म बूम रहता है। लेकिन, पर्यटक बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर होते हैं और लघुशंका के लिए इधर-उधर भटकते हैं। इन सभी स्थलों पर पीने के पानी की भी कोई सुविधा नहीं है। हल्दीघाटी के पर्यटन स्थलों के विकास की सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही है। धरातल पर तो टॉयलेट और पीने के पानी जैसी जरूरी और बुनियादी जरूरतों पर भी शासन-प्रशासन और जिम्मेदार विभागों के ध्यान हनंी देने से शर्मनाक स्थिति बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि 18 जून 1997 को महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक की नींव रखी गई थी। पर्यटन विभाग के जरिये यहां विकास कार्यों को लेकर एक दशक तक करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यहां पर्यटकों को एक टॉयलेट तक मयस्सर नहीं हो पाया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने रक्ततलाई, बादशाही बाग और चेतक समाधि का अधिग्रहण कर वर्ष 2003 से 2006 तक उद्यान विकसित किए थे। लेकिन, इनकी वर्तमान िस्थति देखें तो ये स्थल अपनी बदहाली अपने ही मुंह बताते नजर आते हैं।

रक्ततलाई : उद्यान परिसर में फाइबर से निर्मित रेडिमेड टॉयलेट को रखे हुए करीब एक दशक से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन इनके ताले कभी खुले ही नहीं। परिसर के बाहर खमनोर पंचायत की ओर से बनाए गए पब्लिक टॉयलेट में पानी ही नहीं है। दरवाजे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और गंदगी जमा है। ऐसे में ये उपयोग करने लायक ही नहीं है।

शाहीबागः हाल के वर्षों में पत्थर, सीमेंट, लोहे और अन्य निर्माण सामग्री से पुरुष, महिला और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनवाए गए थे। रक्ततलाई की ही तरह शाहीबाग में भी रेडिमेड टॉयलेट 10 साल से भी अधिक समय से पड़े हुए हैं। इन दोनों ही प्रकार के टॉयलेट पर भी ताले लगे हैं।

चेतक समाधिः परिसर में पुरुष-महिला और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए टॉयलेट का निर्माण किया गया, मगर इन पर भी जब से बने तभी से ताले लगे हुए हैं। हल्दीघाटी के स्थलों में सबसे ज्यादा पर्यटक चेतक समाधि पर आते हैं, लेकिन उन्हें यहां न तो टॉयलेट की सुविधा मिलती है और न ही पीने का पानी।

प्रताप स्मारकः ऊंची पहाड़ी पर बने स्मारक पर महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ प्रतिमा और यहां से हल्दीघाटी की पहाड़ियों का विहंगम दृश्य पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण है। इन्हें देखने आने वाले लाखों पर्यटक टॉयलेट और पानी जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशान होते हैं। इस तरह करोड़ों रुपए खर्च कर देने के बावजूद ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का पूर्ण अभाव है।

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