Rajsamand App

राजसमंद क्षैत्र के समाचार & अपडेट्स

सालोर सीएचसी विवाद: पांच माह से खींचतान जारी, नये भवन पर नाम की पट्टिका को लेकर छिड़ा विवाद, अधिकारियों के पास नहीं कोई निर्णय

इस ख़बर को सुनने के लिए 👇"Listen" पर क्लिक करें
[tta_listen_btn]
[tts_play]
[gspeech]

राजसमंद. खमनोर पंचायत समिति के सालोर गांव में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के नए भवन पर लगे नाम की पट्टिका को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 1989 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित इस केंद्र को बाद में सीएचसी में क्रमोन्नत किया गया था। लेकिन अब निजी नाम की पट्टिका को लेकर दो पक्षों के बीच जंग छिड़ गई है, जो पिछले पांच महीनों से खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

विवाद की जड़

इस विवाद की शुरुआत जून महीने में हुई, जब गांव के कुछ लोगों ने सीएचसी प्रभारी डॉ. संजय से शिकायत की कि नए भवन के मुख्य द्वार पर गट्टूबाई खेरोदिया के नाम की स्टील की पट्टिका लगी है। उन्होंने इसे हटाने की मांग की, जिसे सीएचसी प्रभारी ने सीएमएचओ को बताया। इस बीच, कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने गट्टूबाई खेरोदिया सीएचसी सालोर के नाम का सिल्वर कलर का शाइन बोर्ड लगा दिया।

प्रशासन की अनिश्चितता

इस विवाद में सीएमएचओ भी बार-बार निदेशक से सलाह मांगते रहे हैं। सीएचसी प्रभारी ने बोर्ड हटाने के निर्देश पर पुलिस से मदद मांगी है, लेकिन पुलिस ने उन्हें कार्यपालक मजिस्ट्रेट से सक्षम आदेश लाने की सलाह दी है। सीएचसी प्रभारी के अनुसार, “मेरी रिपोर्ट पर पुलिस ने कहा कि जाब्ता उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन आदेश लाकर दें।”

कलक्टर के निर्देश और दूसरा पक्ष

विवाद को देखते हुए कलक्टर ने बोर्ड हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अब दूसरा पक्ष भी मैदान में आ गया है, जिसने सीएचसी के पुराने भवन के निर्माण में अपने योगदान का दावा किया है और बोर्ड को यथावत रखने की मांग की है।

वर्तमान स्थिति

डॉ. हेमंत बिंदल, सीएमएचओ ने कहा कि “निदेशक को जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उस पर अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है।” ऐसे में सालोर सीएचसी की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय समुदाय में भी असंतोष पैदा कर रही है।

October 14, 2024

You May Also Like👇

Supportscreen tag
var ttsInterval; (function() { // Ensure DOM is loaded function initTTS() { var btn = document.getElementById('ttsPlayBtn'); if (!btn) return; btn.addEventListener('click', function() { var content = document.querySelector('.entry-content') || document.querySelector('.post-content'); if (!content) { alert('Post content not found'); return; } var text = content.innerText.trim(); if (!text) return; // Stop previous speech if (window.speechSynthesis.speaking) { window.speechSynthesis.cancel(); } var utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 1; utterance.pitch = 1; window.speechSynthesis.speak(utterance); }); } // Old Elementor may need small timeout for DOM if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initTTS); } else { setTimeout(initTTS, 300); } })();